गुरुवार, 24 जुलाई 2025

Programmed Learning (अभिक्रमित अधिगम)

 

Programmed Learning (अभिक्रमित अधिगम) – मूल सिद्धांत, प्रकार, उपयोग एवं सीमाएँ (Teaching Machines)
1. अभिक्रमित अधिगम (Programmed Learning) की परिभाषा:

    अभिक्रमित अधिगम एक ऐसी शिक्षण विधि है जिसमें शिक्षण सामग्री को इस प्रकार छोटे-छोटे चरणों (Steps या Frames) में प्रस्तुत किया जाता है कि विद्यार्थी स्वयं उसे पढ़कर और उत्तर देकर आगे बढ़ता है। यह स्वनिर्देशित अधिगम (Self-Paced Learning) का एक वैज्ञानिक तरीका है।

    अभिक्रमित अधिगम (Programmed Instruction) एक ऐसी अधिगम प्रणाली है जिसमें शिक्षण सामग्री को इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है कि छात्र अभिक्रमित, तार्किक, और स्व-नियंत्रित तरीके से सीखते हैं। प्रत्येक शिक्षण खंड (Frame) में जानकारी, प्रश्न, छात्र की प्रतिक्रिया और त्वरित फीडबैक शामिल होता है।

 परिभाषा (B.F. Skinner के अनुसार):

"Programmed Learning एक ऐसी प्रणाली है जिसमें शिक्षण सामग्री को इस प्रकार अभिक्रमित किया जाता है कि छात्र को प्रत्येक कदम पर प्रतिक्रिया देने के लिए प्रेरित किया जाता है और उसे तुरन्त फीडबैक दिया जाता है।"

2. अभिक्रमित अधिगम की विशेषताएँ (Key Features):

क्रम

विशेषता

विवरण

1

क्रमिक प्रस्तुति (Sequential Presentation)

सामग्री छोटे-छोटे भागों (Frames) में दी जाती है जो तार्किक क्रम में होती है।

2

छात्र की सक्रिय भागीदारी

छात्र हर फ्रेम में उत्तर देता है, जिससे सीखना सक्रिय होता है।

3

प्रत्यक्ष फीडबैक (Immediate Feedback)

छात्र को तुरंत बताया जाता है कि उसका उत्तर सही है या नहीं।

4

पुनर्बलन (Reinforcement)

सही उत्तर देने पर छात्र को आगे बढ़ने की अनुमति मिलती है जिससे सीखने में रुचि बनी रहती है।

5

स्वगति अधिगम (Self-Paced Learning)

छात्र अपनी गति से सीखता है, जिससे व्यक्तिगत अंतर का सम्मान होता है।

6

त्रुटि नियंत्रण (Error Control)

गलतियों की संभावना को न्यूनतम किया जाता है क्योंकि फ्रेम सरल और स्पष्ट होते हैं।

2. अभिक्रमित अधिगम के मूल सिद्धांत (Basic Principles of Programmed Learning):

क्रम

सिद्धांत

विवरण

1

छोटे-छोटे चरण (Small Steps)

सीखने की सामग्री को छोटे हिस्सों (Frames) में बाँटा जाता है।

2

सक्रिय भागीदारी (Active Responding)

छात्र को प्रत्येक चरण में उत्तर देना होता है।

3

तत्काल प्रतिपुष्टि (Immediate Feedback)

सही उत्तर पर छात्र को तुरन्त सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है।

4

स्व-गति पर अधिगम (Self-Pacing)

छात्र अपनी गति से सामग्री पढ़ सकता है।

5

नियमित सुदृढ़ीकरण (Reinforcement)

सही उत्तर देने पर छात्र को आगे बढ़ने की अनुमति मिलती है, जिससे सीखने को मजबूती मिलती है।

6

सुधारात्मक प्रतिक्रिया (Error Correction)

गलत उत्तर पर सुधारात्मक निर्देश मिलते हैं।

3. अभिक्रमित अधिगम की रूपरेखा (Structure of Programmed Instruction):

हर फ्रेम में निम्नलिखित चार भाग होते हैं:

  1. उत्तेजना (Stimulus): एक जानकारी या निर्देश जो छात्र को सोचने के लिए प्रेरित करे।
  2. प्रतिक्रिया (Response): छात्र द्वारा उस फ्रेम के अंत में दिया गया उत्तर।
  3. प्रतिक्रिया की जाँच (Confirmation): सही या गलत उत्तर की जानकारी।
  4. नवीन फ्रेम की ओर निर्देश (Instruction for Next Step): अगला फ्रेम क्या पढ़ना है।

4. अभिक्रमित अधिगम के प्रकार (Expanded Explanation):

 1. रैखिक अभिक्रमितन (Linear Programming)

  • विकासकर्ता: B.F. Skinner
  • एक समान मार्ग पर सभी छात्र चलते हैं।
  • हर छात्र सभी फ्रेम को एक-एक करके पढ़ता है, भले ही उत्तर सही हो या गलत।

विशेषताएँ:

  • फ्रेम छोटे और सरल होते हैं
  • त्रुटि दर न्यूनतम होती है
  • एकरूपता रहती है

उदाहरण:
Frame 1 → Frame 2 → Frame 3 … (
हर छात्र यही क्रम अपनाएगा)

 2. शाखीय अभिक्रमितन (Branching Programming)

  • विकासकर्ता: Norman A. Crowder
  • छात्र के उत्तर के अनुसार रास्ता बदलता है (शाखा बनती है)
  • गलत उत्तर देने पर “रिमेडियल फ्रेम” दिए जाते हैं।

विशेषताएँ:

  • व्यक्तिगत भिन्नताओं को ध्यान में रखता है
  • अधिक विश्लेषणात्मक और गहन अधिगम
  • बड़े फ्रेम, बहुविकल्पीय उत्तर

उदाहरण:
Frame 1 →
सही उत्तर Frame 2
           →
गलत उत्तर Remedial Frame A

मैथेटिक्स अभिक्रमितन (Mathetics Programming)

  • विकासकर्ता: Thomas F. Gilbert
  • कौशल आधारित अधिगम (Skill-based Instruction)
  • अधिगम में “सामाजिक व्यवहार”, “रणनीति” और “उपयोग” पर ज़ोर

उपयोग:

  • उच्च स्तर की सोच और व्यावसायिक प्रशिक्षण

प्रकार

विवरण

1. रैखिक अभिक्रमितन (Linear Programming)

– B.F. Skinner द्वारा विकसित– छात्र एक-एक क्रम से आगे बढ़ता है– सभी को समान क्रम में शिक्षण सामग्री मिलती है– प्रत्येक उत्तर के बाद अगला चरण (Frame) आता है

2. शाखीय अभिक्रमितन (Branching Programming)

– Norman Crowder द्वारा विकसित– इसमें छात्र के उत्तर के अनुसार रास्ता बदलता है– गलत उत्तर देने पर छात्र को Remedial Frame पर भेजा जाता है– यह व्यक्तिगत अंतर को अधिक महत्व देता है

3. बहुविकल्पीय अभिक्रमितन (Mathetics Programming)

– Thomas Gilbert द्वारा विकसित– यह अधिगम को अधिक विश्लेषणात्मक और विचारशील बनाने पर ज़ोर देता है– इसमें रणनीति, सिद्धांत और कौशल का विकास होता है

5. अभिक्रमित अधिगम सामग्री का निर्माण (Development of Programmed Material):

निर्माण की प्रमुख चरण:

चरण

विवरण

1

उद्देश्य निर्धारण

2

विषय चयन एवं विश्लेषण

3

फ्रेम का निर्माण

4

फीडबैक और मार्गदर्शन

5

पायलट परीक्षण

6

अंतिम रूप देना

6. अभिक्रमित शिक्षण सामग्री (Programmed Material) के उपयोग (Uses):

क्षेत्र

उपयोग

विद्यालय शिक्षा

गणित, भाषा, विज्ञान जैसे विषयों में व्यक्तिगत शिक्षण के लिए

स्व-अधिगम

छात्र बिना शिक्षक की मदद से स्वयं अध्ययन कर सकते हैं

ओपन और डिस्टेंस लर्निंग

इग्नू जैसे संस्थानों में बड़े पैमाने पर उपयोग

मशीन आधारित शिक्षण

कंप्यूटर और टीचिंग मशीनों में प्रोग्राम्ड मटेरियल प्रयोग होता है

धीमे शिक्षार्थियों के लिए

उनकी गति से सीखने का अवसर

7. टीचिंग मशीन (Teaching Machines):

 परिभाषा:

Teaching Machines वे उपकरण या यंत्र होते हैं जिनमें अभिक्रमित शिक्षण सामग्री इस प्रकार दी जाती है कि छात्र उसे पढ़े, उत्तर दे और फीडबैक प्राप्त करे।

 विशेषताएँ:

  • मशीन छात्रों को प्रश्न, विकल्प, उत्तर प्रविष्टि, और तत्काल प्रतिक्रिया प्रदान करती है।
  • आधुनिक काल में कंप्यूटर और मोबाइल एप भी टीचिंग मशीनों का रूप हैं।

 उदाहरण:

  • स्किनर की टाइपिंग बेस्ड टीचिंग मशीन
  • कंप्यूटर आधारित शिक्षण सॉफ्टवेयर (CAI - Computer Assisted Instruction)

टीचिंग मशीनें (Teaching Machines) का उपयोग:

प्रारंभिक उदाहरण:

Skinner Teaching Machine (1954)
एक यांत्रिक उपकरण जिसमें छात्र उत्तर टाइप करता था, और सही होने पर अगला फ्रेम दिखता था।

आधुनिक उदाहरण:

  • CAI (Computer Assisted Instruction)
  • E-learning Platforms
  • Learning Apps (BYJU’s, Khan Academy, Diksha etc.)

8. अभिक्रमित शिक्षण सामग्री और टीचिंग मशीनों की सीमाएँ (Limitations):

सीमा

विवरण

1

व्यक्तिगत संपर्क की कमी

2

सृजनात्मकता की कमी

3

मूल्य आधारित अधिगम कठिन

4

प्रारंभिक निर्माण में समय व लागत अधिक

5

हर विषय के लिए उपयुक्त नहीं

 9. अभिक्रमित अधिगम के उपयोग (Uses of Programmed Instruction):

क्षेत्र

विवरण

विद्यालयों में

गणित, विज्ञान, भाषा के विषयों में अभ्यास और रिवीजन हेतु

स्व-अध्ययन

घर पर बिना शिक्षक के स्वयं सीखने में सहायक

खुले व दूरस्थ शिक्षा संस्थान

IGNOU, NIOS आदि में व्यापक प्रयोग

प्रशिक्षण कार्यक्रमों में

पुलिस, रेलवे, बैंक, शिक्षक प्रशिक्षण आदि

धीमे शिक्षार्थियों के लिए

अपनी गति से अभ्यास करके आत्मविश्वास प्राप्त करना

10. अभिक्रमित अधिगम की सीमाएँ (Limitations):

सीमा

विवरण

शिक्षक-छात्र संवाद की कमी

व्यक्तिगत संप्रेषण या प्रेरणा नहीं मिलती

 रचनात्मकता में कमी

उत्तर पहले से तय होते हैं, स्वतंत्र उत्तर नहीं

 भावनात्मक और सामाजिक विकास नहीं

केवल संज्ञानात्मक क्षेत्र तक सीमित

 निर्माण में समय और श्रम अधिक

शिक्षण सामग्री बनाने में विशेषज्ञता चाहिए

 तकनीकी संसाधनों की आवश्यकता

हर विद्यालय या छात्र के पास साधन नहीं होते

7. निष्कर्ष (Conclusion):

·  अभिक्रमित अधिगम (Programmed Learning) एक वैज्ञानिक, तार्किक और स्व-नियंत्रित शिक्षण प्रक्रिया है जो छात्र को स्वयं सीखने, अभ्यास करने और सुधारने का अवसर देती है।

·  यह विशेष रूप से व्यक्तिगत शिक्षा, धीमे शिक्षार्थियों, ओपन एजुकेशन तथा कंप्यूटर आधारित शिक्षण में अत्यंत उपयोगी है।

·  यह शिक्षण का पूरक साधन है – शिक्षक का स्थान नहीं ले सकता, बल्कि उसे सशक्त करता है।

·  अभिक्रमित अधिगम एक शिक्षण और अधिगम का वैज्ञानिक, सुव्यवस्थित और तार्किक तरीका है। यह छात्रों को आत्मनिर्भर, सक्रिय और अनुशासित बनाता है।यह केवल एक सहायक विधा (Supplementary Method) है, शिक्षक की जगह नहीं ले सकती।

·  जब शिक्षक, तकनीक और सामग्री का समन्वय होता है तभी यह विधि सर्वाधिक प्रभावशाली बनती है।

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