अनुदेशात्मक उद्देश्यों का निर्माण
(Formulation of Instructional Objectives)
अनुदेशात्मक उद्देश्य (Instructional Objectives) वे स्पष्ट, मापनीय और व्यवहार पर आधारित लक्ष्य होते हैं जिन्हें शिक्षण प्रक्रिया के अंत में विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त किया जाना अपेक्षित होता है।
इनका मुख्य उद्देश्य शिक्षण को उद्देश्यपरक, प्रभावी और मूल्यांकन योग्य बनाना है।
1. अनुदेशात्मक उद्देश्य
Instructional Objectives ऐसे व्यवहारपरक वक्तव्य (Behavioural Statements) होते हैं जो यह स्पष्ट करते हैं कि किसी पाठ या शिक्षण सत्र के अंत में विद्यार्थी क्या सीखेंगे और क्या प्रदर्शन करेंगे।
उद्देश्य के लाभ:
- शिक्षण को लक्ष्य-आधारित बनाते हैं।
- सही सामग्री और विधियों के चयन में मदद करते हैं।
- मूल्यांकन को उद्देश्यपरक बनाते हैं।
- विद्यार्थियों में स्पष्ट अपेक्षाएँ निर्मित करते हैं।
2. SMART सिद्धांत पर आधारित उद्देश्य निर्माण
Instructional Objectives को SMART सिद्धांत के अनुसार बनाया जाना चाहिए:
अक्षर
अर्थ
विवरण
S
Specific
उद्देश्य स्पष्ट और संकीर्ण हों
M
Measurable
मापने योग्य हों
A
Achievable
विद्यार्थी की क्षमता अनुसार हों
R
Relevant
पाठ्यक्रम और सीखने के संदर्भ से जुड़े हों
T
Time-bound
समयसीमा में पूरे किए जा सकें
2. व्यवहारात्मक विनिर्देशन (Behavioural Specification)
Behavioural Objectives या Behavioural Specification का आशय है:
“शिक्षण के पश्चात विद्यार्थी कौन-सा विशिष्ट व्यवहार प्रदर्शित करेगा, जिसे देखा, मापा और मूल्यांकित किया जा सके।”
उदाहरण:1. अस्पष्ट उद्देश्य: "विद्यार्थी स्वतंत्रता संग्राम को समझेगा।"2. स्पष्ट व्यवहार उद्देश्य: "विद्यार्थी 1857 की क्रांति के कारणों को चार बिंदुओं में स्पष्ट करेगा।"इसका मुख्य उद्देश्य है:
"विद्यार्थी के व्यवहार को ऐसे रूप में लिखना कि वह प्रदर्शित किया जा सके, मापा जा सके और मूल्यांकन किया जा सके।"
व्यवहारात्मक उद्देश्य लिखते समय इन बातों का ध्यान रखें:
क्रियाशील क्रिया-शब्दों का उपयोग करेंजैसे: समझेगा, पहचान सकेगा, हल करेगा, वर्गीकृत करेगा, विश्लेषण करेगा, प्रस्तुत करेगा आदि। Abstract क्रिया शब्दों से बचें- जानना, समझना, सीखना-व्याख्या करना, उदाहरण देना, तुलना करनादो प्रमुख व्यवहार:
Entering Behaviour (प्रवेश व्यवहार):
- यह उस स्तर को दर्शाता है जिस पर विद्यार्थी शिक्षण आरंभ करने से पहले होता है।
- शिक्षक इसके आधार पर विद्यार्थियों की प्रारंभिक आवश्यकता को पहचानते हैं।
- यह विद्यार्थी की शिक्षण से पूर्व की प्रारंभिक क्षमता को दर्शाता है।
- उदाहरण: यदि एक विद्यार्थी पहले से जोड़-घटाव जानता है, तो वह गुणा सीखने के लिए तैयार है।
Terminal Behaviour (अंतिम व्यवहार):
- यह उस व्यवहार को दर्शाता है जो विद्यार्थी को शिक्षण के अंत में प्रदर्शित करना चाहिए।
- यह शिक्षण का अंतिम लक्ष्य होता है।
- यह वह वांछित व्यवहार है जिसे विद्यार्थी को शिक्षण के अंत में प्रदर्शित करना चाहिए।
- उदाहरण: "विद्यार्थी तीन अंकों की संख्याओं का गुणा सही-सही कर सके।"
शिक्षक का कार्य: प्रवेश व्यवहार को समझकर ऐसी शिक्षण रणनीति अपनाना जिससे विद्यार्थी अंतिम व्यवहार तक पहुँच सके।
विशेषताएँ:
- क्रियाशील क्रिया-शब्दों (Action verbs) का प्रयोग: बता सकेगा, पहचान सकेगा, वर्गीकृत करेगा, हल करेगा, इत्यादि।
- उद्देश्य को मापने योग्य बनाता है।
4. Bloom’s Taxonomy व्यवहार के तीन क्षेत्र (Three Domains of Behaviour)
अनुदेशात्मक उद्देश्यों को तीन प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जिन्हें Bloom’s Taxonomy के अनुसार इस प्रकार वर्गीकृत किया गया है:
A. Cognitive Domain (ज्ञानात्मक क्षेत्र)
(बौद्धिक एवं मानसिक क्रियाओं से संबंधित)
यह क्षेत्र ज्ञान, समझ, विश्लेषण, संश्लेषण और मूल्यांकन से संबंधित होता है।
स्तर
उद्देश्य का प्रकार
क्रिया-शब्द (Action Verbs)
1. ज्ञान (Knowledge)
तथ्यों को याद करना
सूची बनाएँ, पहचानें, नाम लें
2. समझ (Comprehension)
अर्थ स्पष्ट करना
समझाएँ, उदाहरण दें
3. अनुप्रयोग (Application)
ज्ञान का प्रयोग
हल करें, लागू करें
4. विश्लेषण (Analysis)
भागों में विभाजित करना
तुलना करें, वर्गीकृत करें
5. संश्लेषण (Synthesis)
नए विचार बनाना
संयोजन करें, प्रस्तावित करें
6. मूल्यांकन (Evaluation)
निर्णय लेना
निर्णय करें, आलोचना करें
Bloom's Revised Taxonomy अनुसार स्तर:
स्तर
उद्देश्य
क्रिया-शब्द
1. याद करना
जानकारी पुनः प्राप्त करना
बताना, पहचानना
2. समझना
अर्थ निकालना
समझाना, उदाहरण देना
3. लागू करना
नए संदर्भ में उपयोग
हल करना, प्रयोग करना
4. विश्लेषण
भागों में तोड़ना
तुलना करना, भेद करना
5. मूल्यांकन
निर्णय लेना
निर्णय करना, आलोचना करना
6. सृजन
नया बनाना
संयोजन करना, निर्माण करना
B. Affective Domain (भावात्मक क्षेत्र)
(= अभिरुचि, दृष्टिकोण, मूल्यों से संबंधित)
यह क्षेत्र विद्यार्थियों के दृष्टिकोण, रुचि, मूल्यबोध एवं आत्मनिष्ठ प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
Krathwohl Taxonomy अनुसार स्तर:
स्तर
उद्देश्य का प्रकार
क्रिया-शब्द (Action Verbs)
1. ग्रहण (Receiving)
ध्यान देना
सुनेगा, देखेगा
2. प्रतिक्रिया (Responding)
सहभागिता करना
भाग लेगा, उत्तर देगा
3. मूल्यांकन (Valuing)
महत्व देना
सराहेगा, समर्थन करेगा
4. संगठन (Organization)
मूल्यों का समन्वय
तुलना करेगा, एकीकरण करेगा
5. चरित्र निर्माण (Characterization)
आचरण में परिवर्तन
जीवन में अपनाएगा, उदाहरण बनेगा
C. Psychomotor Domain (मनो-क्रियात्मक क्षेत्र)
(= शारीरिक क्रियाओं एवं कौशलों से संबंधित)
यह क्षेत्र विद्यार्थी की शारीरिक गतिविधियों, गति कौशल और हाथों के कार्यों से जुड़ा होता है।
स्तर
उद्देश्य का प्रकार
क्रिया-शब्द (Action Verbs)
1. अनुकरण (Imitation)
नकल करना
दोहराएगा, अनुकरण करेगा
2. संचालन (Manipulation)
निर्देशानुसार कार्य करना
प्रयोग करेगा, कार्य करेगा
3. सटीकता (Precision)
शुद्धता से करना
दक्षता से करेगा
4. अभ्यस्तता (Articulation)
संयोजन करना
मिलाकर करेगा
5. स्वचालितता (Naturalization)
स्वाभाविक बनाना
आदत बना लेगा
कौशल, गतिविधियाँ, हाथ-आँख समन्वय
Dave और Simpson की रूपरेखा अनुसार स्तर:
स्तर
उद्देश्य
क्रिया-शब्द
1. अनुकरण
देखने के बाद करना
दोहराएगा, अभ्यास करेगा
2. संचालन
स्वयं करके दिखाना
बनाएगा, प्रयोग करेगा
3. सटीकता
त्रुटिरहित क्रिया
सटीक रूप से करेगा
4. अभ्यस्तता
कौशलों को संयोजित करना
जोड़कर करेगा
5. स्वाभाविकता
स्वचालित और दक्षता से करना
सहज रूप से करेगा
5. उद्देश्य लिखने के उदाहरण (Examples of Well-Defined Objectives)
डोमेन
उद्देश्य
व्यवहारिक क्रिया
ज्ञानात्मक
विद्यार्थी मुग़ल काल के 5 शासकों के नाम बताएगा।
"बताएगा" (Knowledge)
भावात्मक
विद्यार्थी राष्ट्रगान के प्रति सम्मान व्यक्त करेगा।
"सम्मान व्यक्त करेगा" (Valuing)
मनो-क्रियात्मक
विद्यार्थी सूती कपड़े की कढ़ाई करेगा।
"कढ़ाई करेगा" (Skill)
6. मूल्यांकन और उद्देश्यों का संबंध
- मूल्यांकन (Evaluation) केवल तभी प्रभावी हो सकता है जब उद्देश्यों को मापने योग्य भाषा में लिखा जाए।
- उद्देश्य ही प्रश्न निर्माण, प्रदर्शन मूल्यांकन, अंकन योजना, और प्रतिक्रिया विश्लेषण का आधार बनते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
Instructional Objectives का निर्माण शिक्षण की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को बढ़ाने का आधार है। जब उद्देश्य:
- स्पष्ट (Clear),
- व्यवहार आधारित (Behavioural),
- मापनीय (Measurable),
- और तीनों क्षेत्रों में संतुलित होते हैं,
तो शिक्षण अधिक सार्थक और शिक्षार्थी-केंद्रित बनता है।
Instructional Objectives केवल शिक्षा के लक्ष्य नहीं हैं, बल्कि ये शिक्षण प्रक्रिया की रीढ़ होते हैं। जब शिक्षक प्रवेश व्यवहार को ध्यान में रखकर व्यवहारपरक उद्देश्यों का निर्धारण करता है, और उन्हें तीनों क्षेत्रों (ज्ञान, भाव, कौशल) में बांटकर क्रियान्वित करता है, तो शिक्षण न केवल प्रभावशाली बल्कि अर्थपूर्ण हो जाता है।
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